काया नगर मझारा रे, हंसला जिण खोज्या निस्तारा लिरिक्स
| गुलाब नाथजी भजन लिरिक्स
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।
लागी लगन हिये बिच गहरी,
कोन है मेटण वाला,
मस्तक ऊपर लिखी फकीरी,
लेख लिख्या करतारा,
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।
सिंह और स्याळ दोनूँ रहता वन म,
चरता न्यारा न्यारा,
एक दिन मेळ मिल्यो मछली को,
सिंह न स्यार सुधारया
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।
गगन मंडल विच उरद मुख कुआ,
बहे अमृत का झारा,
सुगरा सुगरा पिव पिव छाक्या,
प्यासा जाय गवारां
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।
महर भई जद सतगुरु मिलिया,
खोल्या भरम का ताला,
जालिमगिरी सतगुरु शरणे,
राम भज्या निसतारा
काया नगर मझारा रे,
हंसला जिण खोज्या निस्तारा ।।टेर।।
Kaaya Nagar Majhaara Re, Hansla Bhajan Lyrics
Kaaya Nagar Majhaara Re,
Hansla Jin Khojya Nistaara ।।
Laagi Lagan Hiye Bich Gehri,
Kaun Hai Metan Waala,
Mastak Upar Likhi Fakeeri,
Lekh Likhya Kartaara ।।
Sinh Aur Siyaal Donun Rehta Van Mein,
Charta Nyaara Nyaara,
Ek Din Mel Milyo Machhli Ko,
Sinh Ne Siyaal Sudhaarya ।।
Gagan Mandal Vich Urad Mukh Kua,
Bahe Amrit Ka Jhaara,
Sugra Sugra Piv Piv Chhaakya,
Pyaasa Jaay Gavaara ।।
Mehar Bhayi Jad Satguru Milya,
Kholya Bharam Ka Taala,
Jaalimgiri Satguru Sharne,
Ram Bhajya Nistaara ।।












