गुरु ज्ञान ध्यान, को झबरक दिवलो भजन लिरिक्स

Guru Gyan Dyan Ko Jhabarak Diwalo Lyrics

गुरु ज्ञान ध्यान को झबरक दिवलो,
हालो सत् के मारगाँ ॥टेर॥

आप सुवारथ सब जग राचै,
परमारथ कुण राचै ओ बाबाजी,
परमारथ रा राचणियाँ नर थोड़ा रे बीरा ॥1॥


हाथाँ में थारे झबरक दिवलो,
आंगनियो कोनी सूझे ओ बाबाजी,
पैड़ी ये दुहेली किस विध चढस्यो रे बीरा ॥2॥


समदरिये रा माणसिया थे,
तालरियाँ कांई रीइया ओ बाबाजी,
समदरिये में महंगा मोती निपजै रे बीरा ॥3॥


ओछे जल का मानसिया थारी,
तुष्णा कबुहूँ न भागै ओ बाबाजी,
पर नार्यों रा मोहेड़ा नर हीणा रे बीरा ॥4॥


तँवराँ मे टीकायत सिद्ध श्री,
रामदेवजी बोल्या ओ बाबाजी,
हाथ लगेड़ो माणसियो मत खोवो रे बीरा ॥5॥


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