Top 20 Ram Bhajan With Lyrics in Hindi

भगवान श्रीराम के भजन केवल संगीत नहीं बल्कि भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक शांति का अनुभव हैं। राम भजन सुनने और पढ़ने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। यदि आप सबसे लोकप्रिय और सुपरहिट राम भजन लिरिक्स खोज रहे हैं, तो यहाँ 2026 के Best Top 20 Ram Bhajan With Lyrics in Hindi दिए गए हैं। इन भजनों को लाखों भक्त रोज सुनते, गाते और अपने सत्संग में शामिल करते हैं।

Table of Top 20 Ram Bhajan With Lyrics in Hindi

1. श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में लिरिक्स

Top 20 Ram Bhajan With Lyrics in Hindi

यह भजन भगवान श्रीराम और माता जानकी के प्रति गहरे प्रेम और श्रद्धा को दर्शाता है। इस भजन की सबसे खास बात इसकी मधुरता और भक्ति भाव है, जो सुनते ही भक्त को प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन कर देता है। सत्संग, कथा और भजन संध्या में यह भजन बहुत लोकप्रिय है और भक्तों के दिल को गहराई से छू जाता है।

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,
देख लो मेरे दिल के नगीने में।

मुझको कीर्ति ना वैभव ना यश चाहिए,
राम के नाम का मुझ को रस चाहिए,
सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।

राम रसिया हूँ मैं, राम सुमिरण करूँ,
सिया राम का सदा ही मैं चिंतन करूँ,
सच्चा आनंद है ऐसे जीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।

फाड़ सीना हैं, सब को ये दिखला दिया,
भक्ति में मस्ती है, सबको बतला दिया,
कोई मस्ती ना, सागर को मीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,
देख लो मेरे दिल के नगीने में।

2. भजमन राम चरण सुखदाई श्री राम भजन लिरिक्स

Bhajman Ram Charan Sukhdai Lyrics

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाईं ।।टेर।।

जिहि चरणन से निकसी सुरसरि,
संकर जटा समाई,
जटासंकरी नाम परो है,
त्रिभुवन तारण आई,
भजमन राम चरण सुखदाईं ।।टेर।।

जिन चरणन की चरण पादुका,
भरत रह्यो लव लाई,
सोइ चरण केवट धोइ लीने,
तब हरि नाव चढ़ाई,
भजमन राम चरण सुखदाईं ।।टेर।।

सोइ चरण संत जन सेवत,
सदा रहत सुखदाई,
सोइ चरण गौतमऋषि नारी,
परसि परमपद पाई,
भजमन राम चरण सुखदाईं ।।टेर।।

दंडकबन प्रभु पावन कीन्हो,
ऋषियन त्रास मिटाई,
सोई प्रभु त्रिलोक के स्वामी,
कनक मृगा संग धाई
भजमन राम चरण सुखदाईं ।।टेर।।

कपि सुग्रीव बंधु भय-ब्याकुल,
तिन जय छत्र फिराई,
रिपु को अनुज बिभीषण निसिचर,
परसत लंका पाई,
भजमन राम चरण सुखदाईं ।।टेर।।

सिव सनकादिक अरु ब्रह्मादिक,
सेष सहस मुख गाई,
तुलसीदास मारुत-सुतकी प्रभु,
निज मुख करत बड़ाई,
भजमन राम चरण सुखदाईं।।

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाईं।।

3. राम दशरथ के घर जन्मे घराना हो तो ऐसा हो लिरिक्स

भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा और धर्म पालन का सुंदर वर्णन करने वाला यह भजन भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है। राम दशरथ के घर जन्मे घराना हो तो ऐसा हो लिरिक्स भजन में श्रीराम के जन्म से लेकर रावण वध और अयोध्या वापसी तक की प्रमुख घटनाओं को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। यह भजन हमें आदर्श परिवार, मित्रता, प्रेम और धर्म का संदेश देता है।

राम दशरथ के घर जन्मे,
घराना हो तो ऐसा हो,
लोक दर्शन को चल आये,
सुहाना हो तो ऐसा हो ॥

यज्ञ के काम करने को,
मुनीश्वर ले गया वन में
उड़ाए शीश दैत्यन के,
निशाना हो तो ऐसा हो ॥

धनुष को जायकर तोड़ा,
जनक की राजधानी में
भूप सब मन में शरमाये,
लजाना हो तो ऐसा हो ॥

पिता की मानकर आज्ञा,
राम बन को चले जबही
न छोड़ा संग सीता ने,
जनाना हो तो ऐसा हो ॥

सिया को ले गया रावण,
बनाकर वेश जोगी का
कराया नाश सब अपना,
दीवाना हो तो ऐसा हो ॥

प्रीत सुग्रीव से करके,
गिराया बाण से बाली
दिलाई नार फिर उसकी,
याराना हो तो ऐसा हो ॥

गया हनुमान सीता की,
खबर लेने को लंका में
जलाकर के नगर आया,
सियाना हो तो ऐसा हो ॥

बांध सेतु समुंदर में,
उतारा पार सेना को
मिटाया वंश रावण का,
हराना हो तो ऐसा हो ॥

राज्य देकर विभीषण को,
अयोध्या लौटकर आये
वो ब्रम्‍हानंद बल अपना,
दिखाना हो तो ऐसा हो ॥

4. तुम उठो सिया सिंगार करो लिरिक्स इन हिंदी

यह सुंदर राम विवाह भजन माता सीता के श्रृंगार और भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने की दिव्य लीला का वर्णन करता है। तुम उठो सिया सिंगार करो भजन विवाह उत्सवों, रामायण पाठ और धार्मिक आयोजनों में विशेष रूप से गाया जाता है। इस भजन में माता सीता की सुंदरता और श्रीराम के प्रति प्रेम को अत्यंत मधुर शब्दों में व्यक्त किया गया है।

तुम उठो सिया सिंगार करो,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है,
सीता से नाता जोड़ा है,
तुम उठो सिया सिंगार करों,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥

शीश सिया के चुनर सोहे,
टिके की छवि न्यारी है,
न्यारी न्यारी क्या कहिये,
रघुवर को जानकी प्यारी है,
तुम उठो सिया सिंगार करों,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥

हाथ सिया के चूड़ी सोहे,
कंगन की छवि न्यारी है,
न्यारी न्यारी क्या कहिये,
रघुवर को जानकी प्यारी है,
तुम उठो सिया सिंगार करों,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥

कमर सिया के तगड़ी सोहे,
झुमके की छवि न्यारी है,
न्यारी न्यारी क्या कहिये,
रघुवर को जानकी प्यारी है,
तुम उठो सिया सिंगार करों,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥

पैर सिया के पायल सोहे,
बिछिया की छवि न्यारी है,
न्यारी न्यारी क्या कहिये,
रघुवर को जानकी प्यारी है,
तुम उठो सिया सिंगार करों,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है ॥

तुम उठो सिया सिंगार करो,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है,
सीता से नाता जोड़ा है,
तुम उठो सिया सिंगार करों,

5. रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया लिरिक्स

शबरी माता की भक्ति और भगवान श्रीराम के प्रति उनके अटूट प्रेम को दर्शाने वाला यह भजन अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक है। रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया लिरिक्स भजन में भक्त की प्रतीक्षा, समर्पण और प्रभु दर्शन की तड़प को बहुत ही सुंदर तरीके से व्यक्त किया गया है। यह भजन हमें सच्ची भक्ति और धैर्य का संदेश देता है।

।। दोहा ।।
राम भरोसो राम बल, राम नाम बिस्वास।
सुमिरत सुभ मंगल कुसल, मांगत तुलसीदास।

रामा रामा रटते रटते ,
बीती रे उमरिया।
रघुकुल नंदन कब आओगे ,
भीलनी की डगरिया।

में भीलनी सबरी की जाई ,
भजन भाव नहीं जानू रे।
राम तुम्हारे दरसन के हित ,
बन में जीवन पालू रे।
चरण कमल से निर्मल कर दो ,
दासी की झोपड़िया।
रामा रामा रटते रटते ,
बीती रे उमरिया। टेर। ….

रोज सवेरे बन में जाकर ,
रास्ता साफ में करती हु।
अपने प्रभु के खातिर बन से ,
चुन चुन के फल लाती हु।
मीठे मीठे बेरन की ,
भर ल्याई में छबड़िया।
रामा रामा रटते रटते ,
बीती रे उमरिया। टेर। ….

सुन्दर श्याम सलोनी सूरत ,
नैना बिच बसाऊंगी।
पद पंकज की रज धरी मस्तक ,
चरणों में सीस नवाउंगी।
प्रभुजी मुझको भूल गए क्या ,
लो दासी की खबरिया।
रामा रामा रटते रटते ,
बीती रे उमरिया। टेर। ….

नाथ तुम्हारे दर्शन के हित ,
में अबला एक नारी हु।
दर्शन बिन दोऊ नैना तरसे ,
दिल की बड़ी दुखियारी हु।
मुझको दर्शन देवो दयामय ,
डालो मेहर नजरिया।
रामा रामा रटते रटते ,
बीती रे उमरिया। टेर। ….

6. ओ मईया तैने का ठानी मन में भजन लिरिक्स इन हिंदी

ओ मईया तैने का ठानी मन में भजन लिरिक्स भजन माता कैकेयी के निर्णय और भगवान श्रीराम के वनवास की घटना को भावुक अंदाज में प्रस्तुत करता है। ओ मईया तैने का ठानी मन में भजन में राम, सीता और लक्ष्मण के वन जाने की पीड़ा और अयोध्या के दुख का मार्मिक चित्रण किया गया है।

ओ मईया तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में,
दीवानी तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में।।

जदपि भरत तेरो ही जायो,
तेरी करनी देख लजायो,
अपनों पद तैने आप गँवायो,
भरत की नजरन में,
राम-सिया भेज दये री बन में,
हठीली तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में।।

मेहल छोड़ वहाँ नहीं रे मड़ैया,
सिया सुकुमारी,संग दोउ भईया,
काहू वृक्ष तर भीजत होंगे,
तीनों मेहन में,
राम-सिया भेज दये री वन में,
दीवानी तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में।।

कौशल्या की छिन गयी बानी,
रोय ना सकी उर्मिल दीवानी,
कैकेयी तू बस एक ही रानी,
रह गयी महलन में,
राम-सिय भेज दये री बन में।।

ओ मईया तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में,
दीवानी तैने का ठानी मन में,
राम-सिया भेज दये री बन में।।

7. हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की लिरिक्स

हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की लिरिक्स रामायण पर आधारित सबसे प्रसिद्ध भजनों में से एक है। यह भजन भगवान श्रीराम के संपूर्ण जीवन चरित्र, आदर्शों और मर्यादा का विस्तृत वर्णन करता है। राम जन्म, सीता स्वयंवर, वनवास, लंका विजय और रामराज्य तक की पूरी कथा इस भजन में बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत की गई है।

हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….

(दोहा – ॐ श्री महागणाधिपतये नमः,
ॐ श्री उमामहेश्वराभ्याय नमः,
वाल्मीकि गुरुदेव के,
पद पंकज सिर नाय,
सुमिरे मात सरस्वती,
हम पर होऊ सहाय,
मात पिता की वंदना,
करते बारम्बार,
गुरुजन राजा प्रजाजन,
नमन करो स्वीकार)

हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….

जम्बुद्वीपे, भरत खंडे, आर्यावरते भारतवर्षे,
एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की,
यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….

रघुकुल के राजा धर्मात्मा,
चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा,
संतति हेतु यज्ञ करवाया,
धर्म यज्ञ का शुभफल पाया,
नृप घर जन्मे चार कुमारा,
रघुकुल दीप जगत आधारा,
चारों भ्रातो के शुभ नामा,
भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण, रामा….

गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके,
अल्प काल विद्या सब पाके,
पूरण हुई शिक्षा, रघुवर पूरण काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की….

मृदु स्वर कोमल भावना,
रोचक प्रस्तुति ढंग,
एक एक कर वर्णन करे,
लव कुश राम प्रसंग,
विश्वामित्र महामुनि राई,
इनके संग चले दोउ भाई,
कैसे राम ताड़का मारी,
कैसे नाथ अहिल्या तारी…

मुनिवर विश्वामित्र तब,
संग ले लक्ष्मण राम,
सिया स्वयंवर देखने,
पहुचे मिथिला धाम…

जनकपुर उत्सव है भारी,
जनकपुर उत्सव है भारी,
अपने वर का चयन करेगी,
सीता सुकुमारी,
जनकपुर उत्सव है भारी…

जनकराज का कठिन प्रण,
सुनो सुनो सब कोई,
जो तोड़े शिव धनुष को,
सो सीता पति होई…

को तोडे शिव धनुष कठोर,
सब की दृष्टि राम की ओर,
राम विनयगुण के अवतार,
गुरुवर की आज्ञा सिरधार…

सहज भाव से शिव धनु तोड़ा,
जनक सुता संग नाता जोड़ा…

रघुवर जैसा और ना कोई,
सीता की समता नहीं होई,
जो करे पराजित कान्ति कोटी रति काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की….

सब पर शब्द मोहिनी डारी,
मंत्रमुग्ध भए सब नर-नारी,
यों दिन रैन जात है बीते,
लव कुश ने सब के मन जीते,
वन गमन, सीता हरन, हनुमंत मिलन,
लंका दहन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन…

सविस्तार सब कथा सुनाई,
राजा राम भए रघुराई,

राम राज आयो सुख दायी,
सुख समृद्धि श्री घर घर आई…

काल चक्र ने घटना क्रम में,
ऐसा चक्र चलाया,
राम सिया के जीवन में फिर,
घोर अंधेरा छाया….

अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया,
निष्कलंक सीता पे प्रजा ने,
मिथ्या दोष लगाया,
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया….

चल दी सिया जब तोड़ कर,
सब नेह-नाते मोह के,
पाषाण हृदयो में ना,
अंगारे जगे विद्रोह के…

ममतामयी माँओ के आँचल,
भी सिमट कर रह गए,
गुरुदेव ज्ञान और नीति के,
सागर भी घट कर रह गए…

ना रघुकुल ना रघुकुल नायक,
कोई ना सिया का हुआ सहायक,
मानवता को खो बैठे जब,
सभ्य नगर के वासी,
तब सीता को हुआ सहायक,
वन का ऐक सन्यासी….

उन ऋषि परम उदार का,
वाल्मीकि शुभ नाम,
सीता को आश्रय दिया,
ले आए निज धाम….

रघुकुल में कुलदीप जलाए,
राम के दो सूत सिय ने जाए…

(श्रोता गण, जो एक राजा की पुत्री है,
एक राजा की पुत्रवधू हैं,
और एक चक्रवर्ती राजा की पत्नी है,
वही महारानी सीता,
वनवास के दुखो में,
अपने दिन कैसे काटती हैं,
अपने कुल के गौरव और,
स्वाभिमान की रक्षा करते हुए,
किसी से सहायता मांगे बिना,
कैसे अपने काम वो स्वयं करती है,
स्वयं वन से लकड़ी काटती है,
स्वयं अपना धान कूटती है,
स्वयं अपनी चक्की पीसती हैं,
और अपनी संतान को,
स्वावलंबी बनने की शिक्षा कैसे देती है,
अब उसकी करुण झांकी देखिये)

जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की,
राज-रानी होके दिन वन में बिताती हैं…
रहते थे घेरे जिसे दास-दासी आठो याम,
दासी बनी अपनी उदासी को छुपाती है…

धरम प्रवीन सती परम कुलिन सब,
विधि दोशहीन जीना दुख में सिखाती हैं,
जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया,
कूटती है धान भोज स्वयं बनाती है…
कठिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया काटती है,
करम लिखे को पर काट नहीं पाती है…
फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था,
दुख भरे जीवन का बोज वो उठाती है…
अर्धागिनी रघुवीर की वो धरधीर,
भर्ती है नीर, नीर नैन में ना लाती है,
जिसकी प्रजा के अपवादों कुचक्र में वो,
पीसती है चक्की स्वाभिमान बचाती है,
पालती है बच्चो कों वो कर्म योगिनी की भांति,
स्वाभिमानी स्वावलंबी सफल बनाती हैं,
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते,
निठुर नियति को दया भी नहीं आती है….

ओ…उस दुखिया के राज-दुलारे,
हम ही सूत श्री राम तिहारे…

ओ… सीता माँ की आँख के तारे,
लव-कुश है पितु नाम हमारे…

हे पितु भाग्य हमारे जागे,
राम कथा कही राम के आगे ||

8. राम सिया राम लिरिक्स | Ram Siya Ram Lyrics

राम सिया राम भजन भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह भजन आज के समय में सबसे ज्यादा सुने जाने वाले राम भजनों में शामिल है। इसकी मधुर धुन और भावपूर्ण शब्द भक्तों को भक्ति रस में डुबो देते हैं। रामायण पाठ, धार्मिक कार्यक्रम और भक्ति आयोजनों में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।

राम सिया राम भजन लिरिक्स

राम सिया राम
राम सिया राम
राम सिया राम
राम सिया राम

कवन सो काज कठिन जग माही
इस जग में ऐसा कोई काम नहीं
जो हमारे बजरंबली के लिए कठिन हो

हमारे बजरंगबली
स्वयं श्री राम के दूत हैं भाई
उनके लिए भला कोई भी काम
कठिन कैसे हो सकता है

जिनके ह्रदय में श्री राम जी वास करते हों
उनके लिए कोई भी काम कठिन नहीं है

प्रेम से बोलिये बजरंग बली की
जय

कवन सो काज कठिन जग माही

राम जी के चरणों में बैठे हनुमान
राम जी के चरणों में बैठे हनुमान

राम राम राम सियाराम सियाराम
राम राम राम जपे राम हनुमान

राम राम राम सियाराम सियाराम
राम राम राम जपे राम हनुमान

9. जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को भजन लिरिक्स

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को भजन लिरिक्स एक बेहद लोकप्रिय और भावपूर्ण श्री राम भजन है, जिसे सुनकर मन को शांति और भक्ति का अनुभव होता है। इस भजन में भगवान श्रीराम की कृपा और उनके नाम की महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है। यह भजन भक्तों को कठिन समय में प्रभु स्मरण और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

जैसे सूरज की गर्मी से,
जलते हुए तन को,
मिल जाये तरुवर की छाया,
ऐसा ही सुख मेरे,
मन को मिला है
मैं जबसे शरण,
तेरी आया मेरे राम।।

भटका हुआ मेरा मन था कोई,
मिल ना रहा था सहारा,
लहरों से लड़ती हुई नाव को जैसे,
मिल ना रहा हो किनारा,
मिल ना रहा हो किनारा,
उस लड़खड़ाती हुई नाव को जो,
किसी ने किनारा दिखाया,
ऐसा ही सुख मेरे,
मन को मिला है
मैं जबसे शरण,
तेरी आया मेरे राम।।

शीतल बने आग चंदन के जैसी,
राघव कृपा हो जो तेरी,
उजियाली पूनम की हो जाए रातें,
जो थी अमावस अंधेरी,
जो थी अमावस अंधेरी,
युग युग से प्यासी मरुभूमि ने जैसे,
सावन का संदेस पाया,
ऐसा ही सुख मेरे,
मन को मिला है
मैं जबसे शरण,
तेरी आया मेरे राम।।

जिस राह की मंज़िल तेरा मिलन हो,
उस पर कदम मैं बढ़ाऊं,
फूलों में खारों में पतझड़ बहारों में,
मैं ना कभी डगमगाऊं,
मैं ना कभी डगमगाऊं
पानी के प्यासे को तक़दीर ने जैसे,
जी भर के अमृत पिलाया,
ऐसा ही सुख मेरे,
मन को मिला है
मैं जबसे शरण,
तेरी आया मेरे राम।।

जैसे सूरज की गर्मी से,
जलते हुए तन को,
मिल जाये तरुवर की छाया,
ऐसा ही सुख मेरे,
मन को मिला है
मैं जबसे शरण,
तेरी आया मेरे राम।।

10. कोई पीवो राम रस प्यासा भजन लिरिक्स

यह भजन राम नाम की महिमा और उसकी शक्ति को बेहद सुंदर तरीके से दर्शाता है। भजन में बताया गया है कि भगवान राम का नाम अमृत के समान है, जिसे पीने वाला भक्त जीवन के दुखों से मुक्त हो जाता है। यह भजन भक्ति और वैराग्य दोनों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

कोई पीवो राम रस प्यासा भजन लिरिक्स

कोई पीवो राम रस प्यासा,
कोई पीवो राम रस प्यासा।
गगन मण्डल में अमी झरत है,
उनमुन के घर बासा॥टेर॥

शीश उतार धरै गुरु आगे,
करै न तन की आशा।
एसा मँहगा अमी बीकत है,
छः ऋतु बारह मासा॥1॥

मोल करे सो छीके दूर से,
तोलत छूटे बासा।
जो पीवे सो जुग जुग जीवे,
कब हूँ न होय विनासा॥2॥

एंही रस काज भये नृप योगी,
छोडया भोग बिलासा।
सहज सिंहासन बैठे रहता,
भस्ती रमाते उदासा॥3॥

गोरखनाथ, भरथरी पिया,
सो ही कबीर अम्यासा।
गुरु दादू परताप कछुयक,
पाया “सुन्दर” दासा॥4॥

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11. हरि नाम में क्या बंदिश लिरिक्स

हरि नाम में क्या बंदिश लिरिक्स भजन भगवान के नाम जप की महिमा को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि हरि नाम लेने के लिए कोई बंधन नहीं होता। भक्त कभी भी और कहीं भी भगवान का स्मरण कर सकता है। यह भजन सरल शब्दों में गहरी आध्यात्मिक सीख देता है और सुनने वाले के मन में भक्ति भाव जगा देता है।

हरि नाम में क्या बंदिश लिरिक्स

हरि नाम मैं क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए
प्रभु नाम में क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए
ताली बजा-बजाकर,
शुरुआत किजिए
हरि नाम मैं क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए ॥टेर॥

औरों के पास जाने से,
क्या होगा फायदा
चरणों में प्रेम अश्रु की,
बरसात किजिए
प्रभु नाम में क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए
ताली बजा-बजाकर,
शुरुआत किजिए
हरि नाम मैं क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए ॥1॥

करने से पहले काम तूँ,
सौ बार दिल से पूछ
हरगिज़ ना कभी दिल से,
ना घात किजिए
ताली बजा-बजाकर,
शुरुआत किजिए
प्रभु नाम में क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए
हरि नाम मैं क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए ॥2॥

मीरा ने पीके दुनिया को,
हाला दिखा दिया
प्रभु नाम रस का प्याला,
दिन रात पीजिए
ताली बजा-बजाकर,
शुरुआत किजिए
प्रभु नाम में क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए
हरि नाम मैं क्या बंदिश,
दिन रात लिजिए ॥4॥

12. कभी धरा पे आओ नारायण भजन लिरिक्स

कभी धरा पे आओ नारायण भजन लिरिक्स भक्त की भगवान नारायण के प्रति विनती और प्रेम को दर्शाता है। भजन के शब्द सीधे दिल को छूते हैं और भक्त की उस भावना को व्यक्त करते हैं, जिसमें वह भगवान से अपने जीवन में आने की प्रार्थना करता है। भक्ति संध्या और सत्संग में यह भजन बेहद पसंद किया जाता है।

कभी धरा पे आओ नारायण भजन लिरिक्स

कभी धरा पे आओ नारायण,
देख लो इन भक्तों का हाल,
धर्म कर्म की राह छोड़ के,
चलते हैं ये उलटी चाल।

नारायण नारायण हरि हरि
नारायण नारायण हरि हरि

भूल गए हैं ये मानवता,
दानवता मन भाई है,
लोभ मोह छल कपट ने अपनी,
गहरी चाल चलाई है।

सारे भटक ये जाएंगे जो,
तुमने लिया ना इन्हें संभाल,
धर्म कर्म की राह छोड़ के,
चलते हैं ये उलटी चाल।

कभी धरा पे आओ नारायण,
देख लो इन भक्तों का हाल।

करें दिखावा ये भक्ति का,
परदे में ये पाप करें,
खुद बन जाते हैं ये भगवान,
खुद ही ये इंसाफ करें।

देर करो ना हे नारायण,
हो जाएगा जग बेहाल,
धर्म कर्म की राह छोड़ के,
चलते हैं ये उलटी चाल।

कभी धरा पे आओ नारायण,
देख लो इन भक्तों का हाल।

कलियुग ने ऐसा भटकाया,
भूल गए रिश्ते नाते,
पल भर में ये एक दूजे के,
खून के प्यासे बन जाते।

हे नारायण ठगनी माया ने,
फैलाया है ऐसा जाल,
धर्म कर्म की राह छोड़ के,
चलते हैं ये उलटी चाल।

कभी धरा पे आओ नारायण,
देख लो इन भक्तों का हाल।

नारायण नारायण हरि हरि
नारायण नारायण हरि हरि

13. कभी कभी भगवान को भी भजन लिरिक्स

कभी कभी भगवान को भी भजन लिरिक्स भक्त और भगवान के भावनात्मक रिश्ते को बेहद सुंदर तरीके से प्रस्तुत करता है। इसमें दिखाया गया है कि भगवान अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं। इस भजन के बोल सरल होने के साथ-साथ बेहद भावुक हैं, जो हर भक्त के दिल को छू जाते हैं।

Kabhi Kabhi Bhagwan Ko Bhi Lyrics

कभी कभी भगवान को भी
भक्तो से काम पड़े।
जाना था गंगा पार,
प्रभु केवट की नाव चढ़े ॥

अवध छोड़ प्रभु वन को धाये,
सिया-राम लखन गंगा तट आये।
केवट मन ही मन हर्षाये,
घर बैठे प्रभु दर्शन पाए ।
हाथ जोड़ कर प्रभु के आगे
केवट मगन खड़े।
जाना था गंगा पार
प्रभु केवट की नाव चड़े ॥

प्रभु बोले तुम नाव चलाओ,
पार हमे केवट पहुचाओ ।
केवट बोला सुनो हमारी,
चरण धुल की माया भारी ।
मैं गरीब नैया है मेरी
नारी ना होए पड़े।
जाना था गंगा पार
प्रभु केवट की नाव चड़े ॥

केवट दौड़ के जल भर ले आया,
चरण धोय चरणामृत पाया ।
वेद ग्रन्थ जिन के गुण गाये,
केवट उनको नाव चढ़ाए ।
बरसे फूल गगन से ऐसे,
भक्त के भाग्य जगे।
जाना था गंगा पार
प्रभु केवट की नाव चढ़े।।

चली नाव गंगा की धारा,
सिया राम लखन को पार उतारा ।
प्रभु देने लगे नाव चढाई,
केवट कहे नहीं रघुराई ।

कभी कभी भगवान को भी
भक्तो से काम पड़े।
जाना था गंगा पार,
प्रभु केवट की नाव चढ़े ॥
पार किया मैंने तुमको,
अब मोहे पार करो।
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े ॥

14. जिस भजन में राम का नाम ना हो लिरिक्स

राम नाम की महिमा का वर्णन करने वाला जिस भजन में राम का नाम ना हो लिरिक्स भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इसमें बताया गया है कि जिस भजन में राम का नाम नहीं, वह अधूरा है। यह भजन भक्ति की शक्ति और भगवान के नाम के महत्व को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत करता है।

जिस भजन में राम का नाम ना हो

तर्ज :

म्हारा हरिया बन रा सुवटिया

जिस भजन में राम का नाम ना हो,
उस भजन को गाना ना चाहिए ।।टेर।।

चाहे बेटा कितना प्यारा हो,
उसे सिर पे चढ़ाना ना चाहिए,
चाहे बेटी कितनी लाडली हो,
घर घर ने घुमाना ना चाहिए,
जिस भजन में राम का नाम न हों,
उस भजन को गाना ना चाहिए ।।टेर।।

जिस माँ ने हम को जनम दिया,
दिल उसका दुखाना ना चाहिए,
जिस पिता ने हम को पाला है,
उसे कभी रुलाना चाहिए,
जिस भजन में राम का नाम न हों,
उस भजन को गाना ना चाहिए ।।टेर।।

चाहे पत्नी कितनी प्यारी हो,
उसे भेद बताना ना चाहिए,
चाहे मैया कितनी बैरी हो,
उसे राज़ छुपाना ना चाहिए,
जिस भजन में राम का नाम न हों,
उस भजन को गाना ना चाहिए ।।टेर।।

15. दरश देदो रघुनंदन भजन लिरिक्स

दरश देदो रघुनंदन भजन लिरिक्स भगवान श्रीराम के दर्शन पाने की भक्त की गहरी तड़प और प्रेम को दर्शाता है। इसके भावपूर्ण शब्द और मधुर धुन भक्तों को भावुक कर देते हैं। राम भक्तों के बीच यह भजन काफी लोकप्रिय है और भक्ति कार्यक्रमों में अक्सर गाया जाता है।

Daras Dedo Raghunandan Lyrics Bhajan

आ गए आ गए तुम्हारे दरबार,
दरस दे दो रघुनंदन,
दरश देदो रघुनंदन ।।टेर।।

बड़ी दूर से आये है चल के,
तुम्हरी अवध नगरिया,
अवध बिहारी अब तो मोपे,
डारो कृपा नजरिया,
सो होजे होजे जन्म साकार,
दरश देदो रघुनंदन ।।टेर।।

धन्य भाग भारत भूमि के,
राम लला जु पधारे,
झूठे बेर खाये सबरी के,
केवट चरण पखारे,
इनकी महिमा को है नैया पार,
दरश देदो रघुनंदन ।।टेर।।

माथे मुकुट कान में कुंडल,
गले में माला सोहे,
सियरघुवर की प्यारी जोड़ी,
सबके मन को मोहे,
प्यारो प्यारो करे सिंगार,
दरश देदो रघुनंदन ।।टेर।।

Singer – Priyanka Chaudhary

16. सीताराम सीताराम सीताराम कहिए भजन लिरिक्स

सीताराम सीताराम सीताराम कहिए भजन लिरिक्स भगवान राम और माता सीता के नाम जप की महिमा को दर्शाता है। इस भजन में बताया गया है कि राम नाम का स्मरण करने से जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। भक्ति और शांति का अनुभव कराने वाला यह भजन सत्संगों में विशेष रूप से गाया जाता है।

सीताराम सीताराम, सीताराम कहिए भजन लिरिक्स

सीताराम सीताराम सीताराम कहिए।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।

मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए ।।1।।

किया अभिमान तो फिर मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग शुभ कर्म करते रहिए ।।2।।

जिन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिए ।।3।।

आशा एक राम जी से दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे राम रस गहिए ।।4।।

17. पायो जी मैंने राम रतन धन पायो लिरिक्स

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो लिरिक्स संत मीराबाई द्वारा रचित अत्यंत प्रसिद्ध भजन है, जिसमें प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण भक्ति के अमूल्य धन का वर्णन किया गया है। यह भजन बताता है कि संसार की दौलत से बढ़कर भगवान का नाम और भक्ति सबसे बड़ा खजाना है।

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो लिरिक्स

पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो हिंदी भजन लिरिक्स

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो,
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु,
कर किरपा अपनायो।

जन्म-जन्म की पूंजी पाई,
जग में सभी खोवायो ।।1।।

खरच नाहि खूटे चोर नाहि लूटै,
दिन-दिन बढ़त सवायो ।।2।।

सत् की नाव खेवटिया सतगुरु,
भवसागर तर आयो ।।3।।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
हरख-हरख जस गायो ।।4।।

18. राम नाम आधार जिन्हें वो जल में राह बनाते हैं लिरिक्स

राम नाम आधार जिन्हें वो जल में राह बनाते हैं लिरिक्स भजन भगवान श्रीराम के नाम की शक्ति और चमत्कार को दर्शाता है। इस भजन में बताया गया है कि जो भक्त सच्चे मन से राम नाम का स्मरण करते हैं, उनके जीवन की कठिन राहें भी आसान हो जाती हैं। यह भजन श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का अद्भुत संदेश देता है।

राम नाम आधार जिन्हें,
वो जल में राह बनाते हैं,
जिन पर कृपा राम करें,
वो पत्थर भी तिर जाते हैं ।।

लक्ष्य राम जी सिद्धि राम जी,
राम ही राह बनायी,
राम कर्म हैं राम ही कर्ता,
राम की सकल बड़ाई
राम काम करने वालों में,
राम की शक्ति समायी,
पृथक पृथक नामो से,
सारे काम करें रघुराई,
भक्त परायण निज भक्तो को,
सारा श्रेय दिलाते है,
जिन पर कृपा राम करें,
वो पत्थर भी तिर जाते हैं ।।

घट घट बसके आप ही अपना,
नाम रटा देते है,
नाम रटा देते है,
हर कारज में निज भक्तो का,
हाथ बटा देते है,
हाथ बटा देते है,
बाधाओं के सारे पथ्थर,
राम हटा देते है,
अपने ऊपर लेकर उनका,
भार घटा देते है,
पथ्थर क्या प्रभु तीनो लोक का,
सारा भार उठाते है,
जिन पर कृपा राम करें,
वो पत्थर भी तिर जाते हैं ।।

राम नाम आधार जिन्हें,
वो जल में राह बनाते हैं,
जिन पर कृपा राम करें,
वो पत्थर भी तिर जाते हैं ।।

19. संसार के खिवैया श्री राम सिया मैया भजन लिरिक्स

संसार के खिवैया श्री राम सिया मैया भजन लिरिक्स एक सुंदर राम-सीता भजन है, जिसमें प्रभु श्रीराम और माता सीता को जीवन की नैया पार लगाने वाला बताया गया है। यह भजन भक्तों को प्रभु की शरण में आने और उनके नाम का स्मरण करने की प्रेरणा देता है। भजन के मधुर बोल हर भक्त के मन को भक्ति रस से भर देते हैं।

संसार के खिवैया राम सिया मैया,
आन विराजे आज केवट की नैया,
जो सब को पार करे, राम सिया मैया,
धन्य भाग केवट के, बने जो खिवैया,
जगत के खिवैया राम सिया मैया ||

नैया पर जब राम जी पधारे,
केवट ने पहले पाँव पखारे,
पाँव क्यों पाखरे, क्या केवट की मनसा,
केवट ने दूर की राम की शंसा,
राम ने पत्थर को पैर क्या लगाया,
उसे सुन्दर सी महिला बनाया,
नाव नार वन गई, सौत घर में आ गई,
एक नार से मेरा घर उजियारा,
दूजी अगर आई तो हो जैहे अँधियारा
राम अपने बाप की बात याद कर लो,
एक नही दो नहीं तीन महतारी,
जिनने राम घर से निकारी,
एक अगर होती राम आपकी महतारी,
क्यों देती आपको घर से निकारी,
सशय करो न मेरे राम सिया मैया,
संसार के खिवैया राम सिया मैया ||

इस तरह केवट ने रामको बैठाया,
और निदयां के उस पार कराया,
सिया ने उतर के देना चाही उतराई,
मुस्कुराके सिया ने मुद्रिका दिखाई,
बोले केवट कैसे लेले उतराई,
सबको पर लगाते राम रघुराई,
फिर हम दोनो की जात एक कहलाई,
अगर माई देना चाहती हो उतराई,
तो वापिस इस घाट, लेना मेरी नैया,
संसार के खिवैया राम सिया मैया ||

20. म्हारा जुना जोशी राम मिलन कद होसी भजन लिरिक्स

म्हारा जुना जोशी राम मिलन कद होसी भजन लिरिक्स एक प्रसिद्ध राजस्थानी राम भजन है, जिसमें भक्त भगवान श्रीराम से मिलने की व्याकुलता व्यक्त करता है। इस भजन के शब्द सीधे भक्त के हृदय को छूते हैं और राम भक्ति की गहराई को दर्शाते हैं। राजस्थान में यह भजन विशेष रूप से सत्संग और भजन संध्या में गाया जाता है।

दोहा :-
चार वेद छ: शास्त्रो में, बात मिली है दोय ।
दुःख दीन्या दुःख होंत है, सुख दीन्या सुख होय ।।

राम नाम के आलसी,और भोजन में होशियार ।
तुलसी ऐसे मित्र को, मेरा बार बार धिक्कार ।।

बीर कमाई आपणी, कदे न निष्फल जाय ।
बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहा से खाय ।।

बोया जब वो आम था, और उग आई बबूल ।
बैठेन लागे छाव में, तो चुभन लागी शुल ।।

मारा जुना जोशी, राम मिलन कद होसी ।।टेर।।

आओ जोशी जी थे, पाट बिराजो,
बाच सुनाओ थारी पोथी जी,
मारा जुना जोशी, राम मिलन कद होसी ।।

खीर खांड का जोशी, भोजन जिमावा,
नूत जिमावा थारा गोती,
मारा जुना जोशी, राम मिलन कद होसी ।।

आठ भरी को जोशी, बागो सिलवासा,
हीरा जडास्या थारी पोथी,
मारा जुना जोशी, राम मिलन कद होसी ।।

बाई तो मीरा के, गिरधर नागर,
राम मिल्या सुख होसी,
मारा जुना जोशी, राम मिलन कद होसी।।

राम मिलन कद होसी,
मारा जुना जोशी,
राम मिलन कद होसी।।

श्री राम भजन लिरिक्स से जुड़े अन्य लोकप्रिय भजन

अगर आपको श्रीराम भक्ति से जुड़े भजन पसंद हैं, तो नीचे दिए गए लोकप्रिय राम भजन लिरिक्स भी जरूर पढ़ें। इन भजनों में भक्ति, प्रेम, विश्वास और श्रीराम के आदर्श जीवन का सुंदर वर्णन मिलता है।

Top 20 Ram Bhajan With Lyrics in Hindi 2026 सुनने और पढ़ने के लाभ

राम भजन केवल भक्ति गीत नहीं बल्कि मन की शांति और आत्मिक शक्ति का माध्यम हैं। भगवान श्रीराम के भजन सुनने से मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। नियमित रूप से राम भजन पढ़ने और सुनने से व्यक्ति का मन भगवान की भक्ति में लगने लगता है।

FAQs – Top 20 Ram Bhajan With Lyrics in Hindi

Q.1 सबसे लोकप्रिय राम भजन कौन सा है?

Ans. राम सिया राम और श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में सबसे लोकप्रिय राम भजनों में शामिल हैं।

Q.2 क्या इन भजनों के Lyrics हिंदी में उपलब्ध हैं?

Ans. हाँ, सभी राम भजनों के हिंदी Lyrics उपलब्ध हैं।

Q.3 क्या ये भजन सत्संग और कथा में गाए जाते हैं?

Ans. हाँ, Ram Bhajan With Lyrics in Hindi भजन सत्संग, रामायण पाठ और भजन संध्या में बहुत लोकप्रिय हैं।

Q.4 राम भजन सुनने से क्या लाभ होता है?

Ans. राम भजन सुनने से मन शांत होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

Top 20 Ram Bhajan With Lyrics in Hindi निष्कर्ष

यदि आप भगवान श्रीराम की भक्ति में डूबना चाहते हैं, तो ये Top 20 Ram Bhajan With Lyrics in Hindi आपके लिए बेहद खास हैं। इन भजनों को पढ़कर और सुनकर भक्त प्रभु श्रीराम के और करीब महसूस करता है। BhajanWithLyrics.com पर आपको ऐसे ही हजारों हिंदी भजन लिरिक्स आसानी से मिल जाएंगे।

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