बनभौरी मैं बैठण आली टूटण ना दे आस मेरी लिरिक्स: एक भावपूर्ण हरियाणवी कुलदेवी माता भजन है, जिसमें भक्त अपनी कुलदेवी से जीवन की कठिनाइयों में सहारा, कृपा और आशीर्वाद की प्रार्थना करता है। इस भजन के बोल श्रद्धा, विश्वास और समर्पण से भरपूर हैं, जो हर भक्त के हृदय को छू लेते हैं। यदि आप बनभौरी मैं बैठण आली टूटण ना दे आस मेरी भजन लिरिक्स, कुलदेवी माता भजन या हरियाणवी माता भजन लिरिक्स खोज रहे हैं, तो यहां आपको इस भजन के सम्पूर्ण बोल हिंदी में मिलेंगे।
बनभौरी मैं बैठण आली टूटण ना दे आस मेरी भजन लिरिक्स
कुलदेवी हो के मेरी,
क्यूँ सुणती ना अरदास मेरी,
बनभौरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
तर्ज – जा रे हंसा।
के मैं तेरा बेटा कोन्या,
क्यूँ मन्ने तू बिसरा री सै,
सारी दुनिया मौज उड़ावे,
मन्ने क्यूँ तरसा री सै,
तेरी सेवा ही मेरा सच्चा धन सै,
तू हे पूँजी ख़ास मेरी,
बनभोरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
जग के ताने सुण-सुण कै माँ,
भीतर तक मैं टूट गया,
मतलबी दुनिया के चक्कर में,
अपणा हाथ भी छूट गया,
तेरी शरण में आण पडया सूँ,
रखले मैया लाज़ मेरी,
बनभोरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
लोग कहै सै तेरी चौखट पै,
जो आवै वो तर जा सै,
सच्चे दिल तै जो भी ध्यावै,
झोली उसकी भर जा सै,
प्रिंस शुभम नै सारी जिंदगी,
मैया जी तेरे नाम करी,
बनभोरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
कुलदेवी हो के मेरी,
क्यूँ सुणती ना अरदास मेरी,
बनभौरी मैं बैठण आली,
टूटण ना दे आस मेरी।।
गायक: प्रिंस जैन
गीतकार: शुभम रिठालिया
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बनभौरी मैं बैठण आली टूटण ना दे आस मेरी भजन लिरिक्स का भावार्थ
यह भजन एक भक्त की अपनी कुलदेवी माता के प्रति अटूट आस्था और विश्वास को दर्शाता है। भक्त माता से प्रार्थना करता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, उसकी उम्मीद और विश्वास कभी न टूटे। यह भजन सिखाता है कि सच्चे मन से की गई माता की भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती और माता सदैव अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
बनभौरी मैं बैठण आली टूटण ना दे आस मेरी भजन लिरिक्स FAQs
1. बनभौरी मैं बैठण आली टूटण ना दे आस मेरी भजन लिरिक्स किस देवी का है?
यह भजन कुलदेवी माता बनभौरी माता को समर्पित एक लोकप्रिय हरियाणवी भक्ति भजन है।
2. इस भजन के गायक कौन हैं?
इस भजन को प्रिंस जैन ने गाया है।
3. इस भजन के गीतकार कौन हैं?
इस भजन के बोल शुभम रिठालिया द्वारा लिखे गए हैं।
4. यह भजन किस भाषा में है?
यह भजन मुख्य रूप से हरियाणवी भाषा में है।
5. यह भजन किस अवसर पर गाया जाता है?
यह भजन माता की चौकी, जागरण, नवरात्रि, कुलदेवी पूजा तथा धार्मिक आयोजनों में गाया जाता है।














