हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी लिरिक्स

हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी लिरिक्स एक अत्यंत मधुर और भक्तिमय निर्गुण भजन है, जिसमें गुरु भक्ति, आत्मा की शुद्धता और सतगुरु के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव प्रकट होता है। इस भजन में साधक अपने सतगुरु से प्रार्थना करता है कि वे उसके जीवन रूपी बाग में कृपा का झूला डालें और आत्मा को दिव्य आनंद से भर दें।

हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी लिरिक्स

हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी।
सतगुरु म्हारा हिण्डे-हिण्डे सुरता नार ॥टेर॥

काया तो नगरिये मे सतगुरु म्हारा आमली जी।
सतगुरु म्हारा छायी छायी च्यारुँ मेर ॥1॥

अगर-चंदन को सतगुरु म्हारा पालणो जी।
सतगुरु म्हारा रेशम डोर घलाय ॥2॥

पाँच सखी मिल पाणीड़े न निसरी जी।
सतगुरु मेरा पाँचू ही एक उणियार ॥3॥

नाथ गुलाब से सतगुरु म्हारा विनती जी।
सतगुरु मेरा गावै-गावै भानीनाथ ॥4॥

Singer: Prakash Gandhi

Hindo To Ghalade Satguru Mhara Baag Me Ji Lyrics

Hindo To Ghalade Satguru Mhara Baag Me Ji
Satguru Mhara Hinde-Hinde Surta Naar

Kaaya To Nagariye Me Satguru Mhara Aamli Ji
Satguru Mhara Chhayi Chhayi Chyarun Mer

Agar-Chandan Ko Satguru Mhara Paalano Ji
Satguru Mhara Resham Dor Ghalay

Paanch Sakhi Mil Paanide Na Nisri Ji
Satguru Mera Paanchu Hi Ek Uniyar

Naath Gulab Se Satguru Mhara Vinti Ji
Satguru Mera Gaavai-Gaavai Bhaninath

हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी लिरिक्स भजन का भावार्थ

यह भजन सतगुरु की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। भक्त अपने जीवन को एक बाग के समान मानकर सतगुरु से उसमें प्रेम, ज्ञान और कृपा का झूला डालने की विनती करता है।

भजन में “काया” को नगर, “पालना” को आध्यात्मिक संरक्षण और “रेशम डोर” को गुरु कृपा का प्रतीक माना गया है। पाँच सखियाँ पाँच इंद्रियों का संकेत देती हैं, जिन्हें सतगुरु के मार्गदर्शन से नियंत्रित किया जाता है।

यह भजन बताता है कि सच्चे गुरु के बिना आत्मा को शांति और मुक्ति प्राप्त नहीं होती।

हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी लिरिक्स भजन क्यों लोकप्रिय है

यह भजन इसलिए लोकप्रिय है क्योंकि इसमें सरल भाषा में गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा है। राजस्थान और निर्गुण भजन परंपरा में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।

सत्संग, भजन संध्या और गुरु वंदना के अवसर पर यह भजन भक्तों को आत्मिक शांति और भक्ति का अनुभव कराता है।

FAQs – हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी लिरिक्स

Q.1 हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी लिरिक्स भजन किसे समर्पित है?

Ans. यह भजन सतगुरु को समर्पित है और गुरु भक्ति की भावना को प्रकट करता है।

Q.2 इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

Ans. इस भजन का मुख्य संदेश है कि सतगुरु की कृपा से ही आत्मा को शांति, ज्ञान और मुक्ति प्राप्त होती है।

Q.3 क्या यह निर्गुण भजन है?

Ans. हाँ, यह एक प्रसिद्ध निर्गुण भजन है जिसमें गुरु महिमा और आत्मिक साधना का वर्णन है।

Q.4 क्या इस भजन के English Lyrics भी उपलब्ध हैं?

Ans. हाँ, इस पोस्ट में हिंदी और English (Roman) दोनों Lyrics दिए गए हैं।

हिण्डो तो घलादे सतगुरु म्हारा बाग मे जी केवल एक भजन नहीं बल्कि गुरु भक्ति का गहरा आध्यात्मिक संदेश है। यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन रूपी बाग में सच्चा आनंद केवल सतगुरु की कृपा से ही प्राप्त होता है।

यदि आप निर्गुण भजन, गुरु वंदना और आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं, तो यह भजन आपके हृदय को अवश्य स्पर्श करेगा।

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