Savann Ri Vad Teeji Saheliyan Lyrics
भजन- रुकमणी मंगल गीत लिरिक्स
सावण री वड तीज सहेलियां,
रुक्मण नावण जावे जी ।
रुणक झुणक पग पायल बाजे,
सात सहेलिया संग जाळे और,
सहेलिया हीरा रे तीरा,
रुकमण बीच पधारी ।
जब जल मांय डूबण लागी,
याद कियो गिरधारी ।
भुजा पकड़ हरी बाहर लाया,
आ कांई बात बिचारी । । टेर । ।
कौन गांव में जन्म कहिजे रानी,
कौन घरां अवतारी ।
नानी रे खिसण मां सुलक्षणी,
दादा जात पवारी ।
कुनणापुर में जन्म कहीजे,
भीम घरां अवतारी ।। टेर ।।
वाचा दे दो भीमजी री लड़की,
पछे घरे पधारों ।
वाचा तो मैं जब हरी देवो,
रूप चतुरभुज धारो ।।
रूप चतुरभुज धारो बनवारी,
शोभा अनंत अपारी । । टेर ।।
ओरों रे तो घुड़ला सोवे,
आप गरुड़ असवारी ।
शिव वाचा और बह्मा वाचा,
वाचा कृष्ण मुरारी ।
जन्मजन्म रा साहेब मारा,
मैं अर्धगियां थारी ।। टेर ।।
वाचा देकर रुकमा बाई,
रंग महल में आयी ।
सामी मिलगी मात सुलक्षणी,
तूं कठे देर लगाई ।।
जल जमना में नावण लागी,
आ गयो कृष्ण मुरारी।
वहां देखयां मैं बाहरे कोनी निकली,
लाज करी अति भारी ।। टेर।।
फीट फीट ऐ मारी बाई रुकमणी,
कुल रे दाग लगायो ।
बडा घरा री बेटी होई ने,
गवालिया बतलायो ।
हंसी हंसी ऐ मारी मां सुलक्षणी,
कुबदिया जात परे री।
पदम भणे पण मैं पाय लागू,
मारो वर गिरधारी ।। टेर ।।














