Jat Mat Sat Sen Satguru Ki Lyrics
जत मत सत सैन सतगुरु की,
ज्यांरे लाग्यो विरह रो बाण,
आठूं पहर ज्यांरे लहर भजन री,
पीयो अमीरस छांण,
फकीरी निर्भय निरंतर जाण ।।टेर।।
अड़ा उड़द मे एक अमीरस कुआं,
भरया रेवे हरबार,
सांस उसांस मे देवे नी हबोला,
सहज हुए भंवपार,
फकीरी निर्भय निरंतर जांण ।।
होय दिवानो चढयो सिकर में,
सज पांचू हथियार,
भारत देख डिगे नही डोले,
बाजे नाम घमसान,
फकीरी निर्भय निरंतर जांण ।।
हद बेहद अनहद के ऊपर,
चेतन सुनमंझार,
करोड़ भाण एक रोंम की सोभा,
सत्पुरुष निर्वाण,
फकीरी निर्भय निरंतर जांण ।।
चुनीनाथ गुरु अगम गम लखिया,
ना कोई भेद विचार,
नानूराम अगम निज नामी,
तां घर मोजां माण,
फकीरी निर्भय निरंतर जांण ।।
जत मत सत सैन सतगुरु की,
ज्यांरे लाग्यो विरह रो बाण,
आठूं पहर ज्यांरे लहर भजन री,
पीयो अमीरस छांण,
फकीरी निर्भय निरंतर जाण ।।
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