शंकर भोलेनाथ त्रिलोचन लिरिक्स
शंकर भोलेनाथ त्रिलोचन,
पाया कोनी पार तेरा।
दीन दयाल दया के सागर,
नाम जपे संसार तेरा ॥टेर॥
शीश गंग गल में भुजङ्ग,
नित पीवे भंग शिव त्रिपुरारी ।
असुर संघारन भगत उबारन,
करत बैल की अशवारी ।
चन्द्र भाल, गल मुण्ड माल,
विकराल भेष तुम तपधारी
कैलाश बास, कर पुरी आश,
अरदास करे सब नर नारी।
जल में थल में बसे अनल में,
जंगल में घर बार तेरा ॥1॥
कर आदर मान जो धरे ध्यान,
बरदान देत नां देर करो ।
अजर अमर कर देते निडर,
तुम अगर किसी पर महर करो
रहे दुष्ट कांप, करि क्रोध आप,
देश्राप भसम कर ढेर करो ।
ध्यान लगाते सब सुख पाते,
रखते जो इतबार तेरा ॥2॥
भोलेनाथ त्रिरशूल हाथ,
दिन रात साथ में पारबती ।
विकराल भेष शंकर महेश,
गल शेषनाग कैलाशपती ।
सुर काम हेत, ले भूत प्रेत,
रणखेत चढे हैं अजब गा ।
जिन धरया ध्यान पा लिया ज्ञान,
क्या जान सके है मूढमता ।
माया अनन्त महादेव सन्त,
निज भक्तों से है प्यार तेरा ॥3॥
शेष , सुरेश ,गनेश, दिनेश, रमेश,
निरन्तर ध्याय रहे ।
सन्त महन्त अनन्त थके,
पर अन्त कोई नही पाय रहे,
तन से मन से सेवा करते,
उनसे प्रेम बढाब
हरनारायण गायन करके,
पायन में सिर नाय रहे ।
कर दया आप द्यो काट पाप,
जो जाप जपे नरनार तेरा ॥4॥
Writter : Harshita
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