घूँघट खोलदे भाया की भावज –
Ghunghat Khol De Lyrics in Hindi
घूँघट खोलदे भाया की भावज,
हियो बिलखे, घूँघट खोलदे,
घूँघट खोलदे भाया की भावज,
हियो बिलखे, घूँघट खोलदे ॥टेर॥
ऐहे…
चाँद के चांदणिये गोरी को,
केवटियो घडिजे रे,
चाँद के चांदणिये गोरी को,
केवटियो घडिजे रे,
दिवले के चांदणे पियो निरखे,
घूँघट खोलदे,
घूँघट खोलदे भाया की भावज,
हियो बिलखे, घूँघट खोलदे ॥टेर॥
ऐहे…
चाँद के चांदणिये गोरी को,
मादलियो घडिजे रे,
चाँद के चांदणिये गोरी को,
मादलियो घडिजे रे,
दिवले के चांदणे पियो निरखे,
घूँघट खोलदे,
घूँघट खोलदे भाया की भावज,
हियो बिलखे, घूँघट खोलदे ॥टेर॥
ऐहे…
चाँद के चांदणिये गोरी को,
गलपटियो घडिजे रे,
चाँद के चांदणिये गोरी को,
गलपटियो घडिजे रे,
दिवले के चांदणे को पियो निरखे,
घूँघट खोलदे,
घूँघट खोलदे भाया की भावज,
हियो बिलखे, घूँघट खोलदे ॥टेर॥
ऐहे…
चाँद के चांदणिये गोरी को,
पायलड़ी घडिजे रे,
चाँद के चांदणिये गोरी को,
पायलड़ी घडिजे रे,
दिवले के चांदणे को पियो निरखे,
घूँघट खोलदे,
घूँघट खोलदे भाया की भावज,
हियो बिलखे, घूँघट खोलदे ॥टेर॥
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