Hojya Hoshiyaar Guraji Ke Sharane Lyrics
होज्या होशियार गुरांजी के शरणै,
दिल साबत फिर डरना क्या ॥टेर॥
करमन खेती धणियाँ सेती,
रात दिनां बीच सोवणा क्या ।
आवेगा हंसला चुग जायेगा मोती,
कण बिन मण निपजाओगा क्या ॥1॥
कांशी पीतल सोना हो गया,
पता चल्या गुरु पारस का ।
घर चेतन के पहरा दे ले,
जाग – जाग नर सोना क्या ॥2॥
नौ सौ नदियाँ निवासी नाला,
खार समुद्र जल डूंगा क्या ।
सुषमण होद भर्या घट भीतर,
नाडूल्याँ में न्हाणा क्या ॥3॥
चित चौपड़ का खेल रच्या है,
रंग ओलख ल्यो स्यारन का ।
गुरु गम पासा हाथ लग्या फिर,
जीती बाजी हारो क्या ॥4॥
रटले रे बंदा अलखजी री वाणी,
हर ने लिख्या सो मिटना क्या ।
शरण मच्छेन्द्र जती गोरक्ष बोल्या,
समझ पड़ी फिर डिगना क्या ॥5॥
Author : Shivansh Jangid














