ईशर मारो भोलो ढालो गौरल म्हारी घणी नखराली गीत लिरिक्स

ईशर मारो भोलो ढालो गौरल म्हारी घणी नखराली गीत लिरिक्स एक सुंदर राजस्थानी लोक-भजन है, जिसमें भगवान शिव (ईशर) और माता पार्वती (गौरल) के बीच प्रेम और नखरे का मनमोहक वर्णन किया गया है। इस गीत में ईशर की सरलता और गौरल के प्यारे नखरों को बहुत ही मधुर अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है।

ईशर मारो भोलो ढालो जी गीत लिरिक्स

ईशर मारो भोलो ढालो गौरल म्हारी घणी नखराली लिरिक्स में भगवान शिव की भोली प्रकृति और माता गौरल के स्नेह भरे नखरों का वर्णन किया गया है, जो इस गीत को बेहद खास बनाता है।

ईशर मारो भोलो ढालो जी,
गौरल म्हारी घणी नखराली जी।

ईशर म्हारो चुनरी लावे जी,
गौरल के दाय न आवे जी।
ईशर मारो भोलो ढालो जी,
गौरल म्हारी घणी नखराली जी।।

ईशर म्हारो बिछिया घड़ावे जी,
गौरल के मन ना भावे जी।
ईशर मारो भोलो ढालो जी,
गौरल म्हारी घणी नखराली जी।।

ईशर म्हारो लाड़ लड़ावे जी,
गौरल ने नखरा आवे जी।
ईशर मारो भोलो ढालो जी,
गौरल म्हारी घणी नखराली जी।।

ईशर म्हारो घुडलो मंगावे जी,
गौरा म्हारी नट नट जावे जी।
ईशर मारो भोलो ढालो जी,
गौरल म्हारी घणी नखराली जी।।

सखियां सारी लाड़ लड़ावे जी,
गौरल के घणी मन भावे जी।
ईशर मारो भोलो ढालो जी,
गौरल म्हारी घणी नखराली जी।।

Ishar Maro Bholo Dhalo Lyrics

Ishar maro bholo dhaalo ji,
Gaural mhari ghani nakhrali ji

Ishar mharo chunri laave ji,
Gaural ke daay na aave ji
Ishar maro bholo dhaalo ji,
Gaural mhari ghani nakhrali ji

Ishar mharo bichhiya ghadave ji,
Gaural ke man na bhaave ji
Ishar maro bholo dhaalo ji,
Gaural mhari ghani nakhrali ji

Ishar mharo laad ladaave ji,
Gaural ne nakhra aave ji
Ishar maro bholo dhaalo ji,
Gaural mhari ghani nakhrali ji

Ishar mharo ghudlo mangaave ji,
Gaura mhari nat nat jaave ji
Ishar maro bholo dhaalo ji,
Gaural mhari ghani nakhrali ji

Sakhiyan saari laad ladaave ji,
Gaural ke ghani man bhaave ji
Ishar maro bholo dhaalo ji,
Gaural mhari ghani nakhrali ji


FAQs

प्रश्न 1: “ईशर मारो भोलो ढालो” गीत किस पर आधारित है?
उत्तर: यह गीत भगवान शिव (ईशर) और माता पार्वती (गौरल) के प्रेम पर आधारित है।

प्रश्न 2: यह भजन किस भाषा में है?
उत्तर: यह राजस्थानी लोकभाषा में लिखा गया भजन है।

प्रश्न 3: यह गीत कब गाया जाता है?
उत्तर: यह गीत तीज, त्योहार और लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाया जाता है।

प्रश्न 4: इस भजन का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: इसमें शिव और पार्वती के बीच प्रेम, नखरे और मधुर संबंध का वर्णन है।


हमसे जुड़े रहें

अगर आपको ईशर मारो भोलो ढालो गौरल म्हारी घणी नखराली लिरिक्स पसंद आए हों तो इसे शेयर जरूर करें।

अगर आप किसी अन्य भजन या गीत के लिरिक्स चाहते हैं तो कमेंट करके हमें बताएं।

Follow & Join Our Community

Leave a Comment

WhatsApp Chat Button