दीन बंधू दीनानाथ मोरी सुध लीजिये लिरिक्स

Deen Bandu Deena Nath Mori Sudh Lijiye Lyrics

दीन बंधू दीनानाथ मोरी सुध लीजिये
दीन के दयाल दाता मोपे दया कीजिये
॥टेर॥

खेती नहीं बाडी नहीं बिणज व्यापार नहीं
ऐसो कोई सेठ नहीं जासे कछु लीजिये
॥1॥

भाई नहीं बन्धु नाही कुटुंब कबीलों नाही
ऐसो कोई मित्र नाही जासे कछु लीजिये
॥2॥

सोने को सुनयो नाही रुपे को रुप्यो नाही
कोडी पैसा पास नाही कहो केसे कीजिये
॥3॥

कहता है मलुकदास छोड़ दे बिरानी आस
सांचो नाम तेरो दाता और किसको लीजिये ॥4॥

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